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युद्ध की विभीषिका

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  युद्ध की विभीषिका मानव सभ्यता ने विज्ञान, तकनीक और विकास के क्षेत्र में जितनी प्रगति की है, उतनी ही बार युद्ध की विभीषिका ने उसे पीछे भी धकेला है। युद्ध केवल सीमाओं का संघर्ष नहीं होता, बल्कि यह मानवता, नैतिकता और अस्तित्व पर सीधा हमला होता है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब जब युद्ध हुए हैं तब तब समाज को अपुरणीय क्षति उठानी पड़ी है। बीसवीं शताब्दी के दो महायुद्ध, प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध ने करोड़ों लोगों की जान ली और तथा अनेक देशों की आर्थिक और सामाजिक संरचना को ध्वस्त कर दिया। विशेष रूप से हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिका द्वारा परमाणु बमबारी ने यह स्पष्ट कर दिया की आधुनिक युद्ध किस हद तक विनाशकारी हो सकते हैं! एक क्षण में पूरा शहर राख में बदल जाता है और पीढ़ियाँ उसके दुष्परिणाम झेलती रहती हैं। युद्ध की विभीषिका केवल रणभूमि तक सीमित नहीं रहती। युद्ध से आप नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। बच्चे अनाथ हो जाते हैं, माहिलाएँ असुरक्षा और विस्थापन का सामना करती हैं और वृद्धजन असहाय और बेसहारा हो जाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएँ चरम...